भगवान शिव का सबसे पवित्र निवास है ‘बाबा धाम’, यहीं गिरा था माता सती का ह्दय

देवघर के बाबा मंदिर को बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग धाम भी कहा जाता है. इस मंदिर का नामकरण सतयुग में ही हो गया था, इसे खुद भगवान ब्रह्मा और विष्णु ने भैरव के नाम पर यहां का नाम वैद्यनाथ धाम रखा था.

भगवान शिव का सबसे पवित्र निवास है ‘बाबा धाम’, यहीं गिरा था माता सती का ह्दय

देवघरः देवघर के बाबा मंदिर को बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग धाम भी कहा जाता है. भारत में बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है. इस शिवलिंग को 'कामना लिंग' भी कहते हैं. 12 ज्योतिर्लिंगों के लिए कहा जाता है कि जहां-जहां महादेव साक्षत प्रकट हुए वहां ये स्थापित की गईं. इसी तरह पुराणों में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की भी कथा है जो लंकापति रावण से जुड़ी है. शास्त्रों के अनुसार बाबा धाम को भगवान शिव का सबसे पवित्र निवास माना जाता है. इस मंदिर का नामकरण सतयुग में ही हो गया था, इसे खुद भगवान ब्रह्मा और विष्णु ने भैरव के नाम पर यहां का नाम वैद्यनाथ धाम रखा था. माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामनाएं पूरी होती है. यहां सावन के महीने में विश्व प्रसिद्ध मेले का आयोजन किया जाता है, इसलिए पूरे सावन में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है. 

बाबा बैद्यनाथ की महिमा अपार  


शास्त्रों के अनुसार यहां माता सती के हृदय और भगवान शिव के आत्मलिंग का सम्मिश्रण है. इसलिए यहां के ज्योतिर्लिंग में अपार शक्ति है. यहां सच्चे मन से पूजा-पाठ और ध्यान करने पर हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है. बड़े- बड़े साधु-संत मोक्ष पाने के लिए यहां आते हैं.

ऐसे पड़ा बैद्यनाथ नाम 


शिवपुराण के शक्ति खंड में इस बात का जिक्र किया गया है कि माता सती के शरीर के 52 खंडों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने सभा जगहों पर भैरव को स्थापित किया था और देवघर में माता का हृदय गिरा था. इसलिए इसे हृदय पीठ या शक्ति पीठ भी कहते हैं. माता के हृदय की रक्षा के लिए भगवान शिव ने यहां जिस भैरव को स्थापित किया था, उनका नाम बैद्यनाथ था. इसलिए जब रावण शिवलिंग को लेकर यहां पहुंचा, तो भगवान ब्रह्मा और बिष्णु ने भैरव के नाम पर उस शिवलिंग का नाम बैद्यनाथ रख दिया.

पंडितों की माने तो यहां के नामकरण के पीछे एक और मान्यता है. त्रेतायुग में बैजू नाम का एक शिव भक्त था. उसकी भक्ति से भगवान शिव इतने प्रसन्न हुए कि अपने नाम के आगे बैजू जोड़ लिया. इसी से यहां का नाम बैजनाथ पड़ा. कालातंर में यही बैजनाथ, बैद्यनाथ में परिवर्तित हुआ.
105 किमी पैदल चलकर भक्त करते हैं जलाभिषेक 

बैद्यनाथ धाम देश के बारह पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग में शामिल है. यहां सालों भर बाबा पर जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. सावन में भक्त सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की कष्टप्रद पैदल यात्रा कर बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और बाबा पर जलाभिषेक करते हैं. यह सिलसिला पूरे एक महीना चलता है.

सुप्रसिद्ध मंदिर के दर्शन करने और बाबा मंदिर में जल चढ़ाने के लिए लोग देश विदेश से यहां पहुंचते है. देवघर में प्रयटकों  के   लिए बहुत से आकर्षण केंद्र है- नौलखा मंदिर, बासुकीनाथ, बैजू  मंदिर और मां शीतला मंदिर है. देवघर हवाई, सड़क और रेल द्वारा देश के अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. यहां सैलानियों के लिए हावाई यात्रा के लिए सुविधा दी गई है. मंदिर आने के लिए निकटतम घरेलू हवाई अड्डा लोक नायक जयप्रकाश हवाई अड्डे, पटना, देवघर से 274 किलोमीटर दूर स्थित है. पटना में बैंगलोर, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई, रांची, भोपाल, अहमदाबाद, गोवा और विशाखापत्तनम जैसे कई शहरों की दैनिक उड़ानें हैं.

सावन में श्रावणी मेला क्यों है खास


श्रावण के महीने के दौरान लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ मंदिर में इकट्ठा होते है. उनमें से ज्यादातर लोग सबसे पहले सुल्तानगंज जाते हैं, जो बाबाधाम से 105 किमी दूर है. सुल्तानगंज में, गंगा उत्तर में बहती है यह इस जगह से है कि भक्तों गंगा जल ले कर बाबा धाम की और पैदल आते है. वे बाबा बैधनाथ मंदिर तक 109 किलोमीटर की दूरी पर चलते हैं,लोग बोल बम बोलते हुए यहां तक बहुत ही श्रद्धा के साथ पहुंचते है. बाबाधाम तक पहुंचने पर, कावरिया पहले शिवगंगा में खुद को शुद्ध करने के लिए एक डुबकी लेते हैं, और फिर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में प्रवेश करते हैं, जहां ज्योतिर्लिंगम पर गंगा जल अर्पित करते है. जुलाई-अगस्त के दौरान यह तीर्थ यात्रा पूरे 30 दिनों के लिए श्रावण के दौरान जारी रहता है. यह दुनिया का सबसे लंबा धार्मिक मेला है विदेशी भूमि के लोग न केवल श्रावण महीने में बल्कि शेष वर्ष के दौरान भी बाबाधाम जाते हैं. सुल्तानगंज से बाबाधाम की राह पर नजर रखने वाले लोगों का एक 109 कि.मी. लंबी मानव श्रृंखला वाली भगवा पहने तीर्थयात्रियों का है. यह अनुमान लगाया जाता है कि एक महीने की इस अवधि में 50 से 55 लाख तीर्थयात्री बाबादम जाते हैं. श्रवण की महान तीर्थ के अलावा, लगभग पूरे वर्ष मार्च में शिवरात्रि के साथ मेला, जनवरी में बसंत पंचमी, सितंबर में भद्रा पूर्णिमा लोगो का आना जाना लगा रहता है.