रांची के तैमारा घाटी का क्या है रहस्य? नजर हटते ही हो जाती है दुर्घटना! यहां पहुंचते ही 2024 में चले जाएंगे आप, फोन में आता है ऐसा MSG

भूतिया घाटी के नाम से मशहूर रांची के तैमारा घाटी इन दिनों चर्चा में है, दरअसल स घाटी से गुजरते ही गाड़ियां बंद पड़ जाती है, मोबाइल का टाइम जोन, साल, समय और दिन सब बदल जाता है. ऐसे में अब बीएसएनएल उठाएगा तैमारा के सबसे बड़े और डरावने रहस्य से पर्दा, जांच के लिए तैमारा भेजी जाएगी उच्चस्तरीय टीम..

रांची के तैमारा घाटी  का क्या है रहस्य? नजर हटते ही हो जाती है दुर्घटना!  यहां पहुंचते ही 2024 में चले जाएंगे आप, फोन में आता है ऐसा MSG

Jhakash news

Taimara ghati ranchi/रांचीः रांची-जमशेदपुर हाईवे में पड़ने वाले तैमारा घाटी के बारे में सुनकर ही लोगो के पसीने निकल आते है. इस घाटी को मौत की घाटी या भूतहा घाटी के नाम से भी जाना जाता है. अबतक अनगिनत लोगों ने इस मौत की घाटी में अपनी जान गंवाई है. इस घाटी में आने के बाद गाड़ियों का अचानक बंद हो जाना, या वाहनों का हादसा हो जाना आम बात है. मगर अब तैमारा घाटी के एक और बड़े रहस्य को लेकर वैज्ञानिकों से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा का बाजार गरम है. दरअसल, बीते कई दिनों से मीडिया में तैमारा घाटी के एक बेहद डरावने रहस्य को लेकर ख़बरें पढ़ने और सुनने को मिल रही है. दावा किया जा रहा है कि रांची के तैमारा घाटी में कुछ ऐसा घटित हो रहा है, जो पारलौकिक है, रहस्यमयी और बेहद डरावनी है. तैमारा घाटी में भूत-प्रेत के किस्से तो अक्सर सुनने को मिलते रहते है. घाटी की घुमावदार सड़क के बीचों-बीच सफेद साड़ी में दिखनेवाली औरत के कारण कई दुर्घटनाओं के होने की बात कही जाती है. इन हादसों से बचने के लिए वहां हनुमान जी और मां काली की प्रतिमाओं की स्थापना भी की गयी है. मगर इस बार तैमारा घाटी से कुछ ऐसी डरावनी घटनाएं सामने आ रही है, जिसे सुनकर अच्छे-अच्छों के रौंगटे खड़े हो जायेंगे. 

रहस्यमयी ढंग से कम हो जाती है गाड़ी की रफ्तार

कई लोगों ने ये दावा किया है कि तैमारा घाटी में उनकी गाड़ी की रफ्तार रहस्यमयी ढंग से कम हो जा रही है. गाड़ी की स्पीड बढ़ाने की लाख कोशिश करने के बावजूद गाड़ी बेहद धीमी रफ्तार से चल रही होती है. ऐसा लगता है कि कोई गाड़ियों को पीछे से खीच रहा है. किसी का कहना है कि गाड़ी की रफ्तार कुछ और होती है, स्पीडोमीटर कुछ और बताता है. अचानक गाड़ी का क्लच प्लेट जाम हो जाता है. गाड़ी रूक जाती है. फिर थोड़ी देर के बाद गाड़ी खुद-ब-खुद स्टार्ट भी हो जाती है. यहीं नहीं, घाटी में रामपुर से लेकर व्यांगडीह के बीच, 14 किलोमीटर लंबा क्षेत्र है, जिसमें प्रवेश करने पर मोबाइल का टाइम जोन ही चेंज हो जाता है. तैमारा घाटी से गुजरने वाले लोगों के मोबाइल की घड़ी का समय बदल जा रहा है. और यह कुछ देर, यानी एक-दो मिनट या एक-दो घंटे नहीं, बल्कि डेढ़-दो साल आगे बढ़ जा रहा है. तारीख और समय पूरी तरह से बदल जा रहा है. घाटी से गुजरने वाले लोगों को ऐसा लगने लगता है मानो वे टाइम ट्रेवल कर रहे है और समय में बहुत आगे आ चुके है. इसके आलावा कई लोगों का ये भी कहना है कि इस पूरे क्षेत्र में उन्होंने स्ट्रीट लाइट को कांपते हुए देखा है. 

इन घटनाओं को तब और बल मिल गया, जब झारखंड के प्रख्याुत पर्यावरणविद नितीश प्रियदर्शी ने इस मसले पर फेसबुक पर पोस्ट डाला. जिसपर अनेक लोगों की प्रतिक्रिया और उनके अनुभव सामने आ रहे हैं.

फ़ोन को ऑन किये तो तारीख देख के चौंक गए

प्रत्यक्षदर्शी ने अपने पोस्टट में लिखा है ”कुछ दिन पहले मेरे मित्र संजय बोस जी ने एक घटना की जानकारी मुझे दी जो उनके साथ इस घाटी में घटी. उनका कहना था कि रांची टाटा रोड में रामपुर से बुंडू रोड में उनको एक फ़ोन आया. वो कार चला रहे थे इसलिए फ़ोन नहीं उठाये. ये घटना 11 जनवरी 2022 की है. जब वो दुबारा फ़ोन करने के लिए फ़ोन को ऑन किये तो तारीख देख के चौंक गए. उसमे तारीख था अगस्त 17, 2023 , और समय था शाम के 3:36 यानि ढेड़ साल आगे के समय से ये फ़ोन आया था. उसके बाद जितने भी कॉल आये उसमे तारीख सही थी बस उसी फ़ोन की तारीख 2023 की थी. आज भी मिस काल में वो नंबर सब से ऊपर ही रहता है. ऐसी घटना सिर्फ उनके साथ नहीं हुई उन एक मित्र के साथ भी हुई.

स्ट्रीट लाइट हमेशा कांपती है

दूसरी घटना दो दिन पहले की है, जब एक एनजीओ में काम करने कमल किशोर सिंह बुंडू टोल ब्रिज पार कर के रात को 8 बजे रांची आ रहे था तो तैमारा घाटी में उनके फोन पे एक मैसेज आया कि मोबाइल के समय और तारीख को ठीक कीजिए. वो मैसेज देख के चौंक गए. तारीख था 25 जनवरी 2024 और समय था सुबह का 9: 06 मिनट. यहां भी लगभग ढेड़ साल का अंतर. ये गड़बड़ी सिर्फ दो मिनट तक रही फिर समय और तारीख अपने आप ठीक हो गई. जब तक और लोग अपना फ़ोन चेक करते वो स्पॉट पार कर चुके थे. उन्होंने ये भी बताया की टाइम जोन बदलने की घटना जहां हुई वहां की स्ट्रीट लाइट हमेशा कांपती रहती है. इनलोगों की कार की स्पीड भी ज्यादा नहीं थी.

ये मान भी लें की ये फ़ोन की गड़बड़ी थी तो ये हर जगह होनी चाहिए

अगर हम ये मान भी लें कि ये फ़ोन की गड़बड़ी थी तो ये हर जगह होनी चाहिए सिर्फ उसी स्पॉट पे क्यों? क्या वहां कोई चुम्बकीय विकिरण है जो मोबाइल को प्रभावित करती है? या फिर कोई काल और समय का मामला है? इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि आप कोई नए जगह पर गए हों तो आपको लगेगा जैसे इस स्थान पर पहले भी आ चुके हैं.

या किसी नए व्यक्ति से आप मिलते हों तो आपको लगेगा कि आप पहले भी उससे मिल चुके हैं. काल और समय के रहस्य पे आज भी शोध हो रहा है. वैसे भी तैमारा घाटी के रहस्य पे बहुत सारी कहानियां सोशल वेबसाइट्स पे हैं. वैज्ञानिक आम लोगो को यही सलाह दे रहे है कि फ़ोन पे आये हुए तारीख को कहीं लिख ले और आने वाले उस समय में क्या होता है उसके होने का इंतज़ार करें.”

लोगों ने क्याह कहा

रांची के पर्यावरणविद के पोस्टे पर बुंडू के रहने वाले डॉ देवांशु चक्रवर्ती ने टिप्पहणी की है ”हमारा घर इसी इलाका बुंडू में है और हमलोग काफी समय से तैमारा घाटी से आना जाना करते रहे हैं. वहां ऐसा कई बार हुआ है नेटवर्क के कारण.” वरिष्ठ पत्रकार आनंद कुमार ने लिखा है कि तैमारा घाटी में नहीं रांची की ओर बढ़ने पर जहां चर्च और स्कूाल है वहां पर गूगल घड़ी का समय और डेट बदल जाता है. ब्रांड इमेज के प्रोप्राइटर सुधीर शर्मा लिखते हैं कि कई बार मैंने भी महसूस किया है. मुझे लगता था कि नेटवर्क का इश्यु है. ये गहन रिसर्च का विषय है.

स्पीड बढ़ाने से भी नहीं बढ़ रही थी

पर्यावरणविद नितिन प्रियदर्शी के पोस्ट पर अन्य लोगो ने भी अपने डरावने अनुभव सांझा किये. रुद्रा ग्रुप ऑफ कंपनी के सीईओ अविनाश मिश्र ने भी अपना अनुभव सांझा करते हुए लिखा कि " हमलोग रात में करीब एक बजे इसे क्रॉस कर रहे थे, करीब एक वर्ष पूर्व. उस समय इस घाटी में हमारी गाड़ी अचानक स्लोऑ हो गई. स्पी‍ड बढ़ाने से भी नहीं बढ़ रही थी. हम वहां से वापस चले गए. करीब दो बजे भी सेम यही हुआ.”

आरएन मेहता ने टिप्परणी की है कि मेरे साथ भी कई दफा ऐसा हुआ है लेकिन मैंने कभी नोटिस नहीं किया यह सोचकर कि नेटवर्क के कारण हुआ होगा.

ललिता सोनी ने लिखा कि हमारे साथ भी होता है हरबार. विकास प्रसाद ने टिप्पेणी की है कि तीन माह पहले मेरे साथ भी यह घटना घटी. दोपहर दो बजे का समय रहा होगा, मैं देवड़ी मंदिर से लौट रहा था अचानक मेरे कार ने एक्‍सीलेटर लेना बंद कर दिया. मुझे लगा मेरा क्ल च प्लेडट खराब हो गया. और मैं फिर किसी तरह से रांची पहुंचा. मेरी गाड़ी वहीं खराब हुई. एक स्थाेनीय अखबार के संपादक सोमनाथ आर्य ने लिख ” कुछ लोगों का मानना है कि यह अंतरिक्ष और धरती का एक ब्रिज है. जहां से कई रहस्यं खुल सकते हैं. यह पृथ्वीम का चुबकीय केंद्र है. बहरहाल पूरा प्रकरण चर्चा में है और किसी गंभीर वैज्ञानिक जांच की मांग की जा रही है.

अचानक मोबाइल ने काम करना बंद कर दिया

रामपुर में स्थित राजकीय कृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय की प्रभारी प्रचार्या है रश्मि सिन्हा. पिछले रविवार को रश्मि सिन्हा सपरिवार जमशेदपुर गई थी. वापसी में व्यांगडीह के बाद उनका मोबाइल टाइम जोन चेंज हो गया. व्हाट्सअप ने भी काम करना बंद कर दिया. फिर अचानक कुछ दूरी के बाद सबकुछ सामान्य हो गया. 

 दो साल आगे की तिथि में बनता है अटेंडेंस

यहां रामपुर से कुछ ही दूरी पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नामकुम है. जहां एक अजीब सी समस्या है. वहां के शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस भी नहीं बना पाते हैं. आज की तरीख में अटेंडेंस बनाते है, तो वह दो साल आगे की तिथि में अपने आप दर्ज हो जाता है. प्रचार्या स्वरणिमा टोप्पो के मुताबिक शिक्षा विभाग ने स्कूल के सभी शिक्षकों को मैनुअल अटेंडेंस बनाने के निर्देश दिए है. 

अब बीएसएनएल की टीम करेगी जांच

तैमारा घाटी में हो रही रहस्यमयी घटनाओं की जांच अब बीएसएनएल के अधिकारी करेंगे. बीएसएनएल के महाप्रबंधक यूपी साह ने बताया कि उन्होंने तथ्यों को बहुत ध्यान से देखा और समझा है. उसके बाद उन्होंने संचार अभियंताओं की एक उच्चस्तरीय टीम बनाई है. यह टीम जल्द ही तैमारा घाटी के दौरे पर जाएगी और इस समस्या के कारण का पता लगाएगी.