वेलेंटाइन डे को प्रेम का दिवस माना जाता है?

वेलेंटाइन डे को पूरी दुनिया अपने अपने तरीके से मना रही है. आमतौर पर दिवस प्रेम का दिवस माना जाता है. कई किस्से ओर कथायें इसके लिए प्रसिद्ध हैं. कुछ ऐसी ही कथा झारखंड से भी जुड़ी है. 

वेलेंटाइन डे को प्रेम का दिवस माना जाता है?

वेलेंटाइन डे को पूरी दुनिया अपने अपने तरीके से मना रही है. आमतौर पर दिवस प्रेम का दिवस माना जाता है. कई किस्से ओर कथायें इसके लिए प्रसिद्ध हैं. कुछ ऐसी ही कथा झारखंड से भी जुड़ी है. 

झारखंड के बादम के राजा की ये कहानी है जिसने प्रेम में अपनी जान दे दी, क्या है उस राजा की कहानी. ये आपको एक मामूली सी झाड़ी लग सकती है. लेकिन ये कोई मामूली झाड़ी नहीं है. बल्कि किसी के प्रेम की निशानी लाल और सफेद गुलाब का फूले है.

इसे आज से करीब 400 साल पहले बादम के तात्कालीन राजा हेमंत सिंह और रानी मधुमिता ने लगाया था. गुलाब की झाड़ियां बादम किले के पास हैं. और इसकी कई विशेषतायें हैं. कहते हैं इस फूल को कहीं और नहीं लगाया जा सकता. 

राजा की झूठी मौत की खबर किसी ने रानी को सुना दी और रानी ने इस कुएं में कूद कर अपनी जान दे दी. बाद में राजा भी इसी कुएं में डूब मरे. 

किले की दीवारें आज भी राजा और रानी के प्रेम की मूक गवाह हैं. 400 सालों से किले के खंडहर उसी शान से खड़े हैं. गुलाब की झाड़ियों के पास ही वो कुआं कुआं है जिसमें राजा रानी की जान गई.

राजा हेमंत की आत्महत्या के बाद उनके पूर्वज रामगढ़ आ गये. और वहीं राजय बसाया. महेंद्र नाथ पाण्डेय, राज पुरोहित अमरे प्रेम की इस दास्तां को आजरा बादम गाता है. ओर राजा रानी के प्रेम की निशानी पूरे शान से मुस्कुराती है जिसकी खुशबू आस पास के इलाके में महकती रहती है.