शिखा और विनीता ने JPSC की परीक्षा में लहराया परचम, जानें कौन हैं दोनों बेटियां

दृढ़ इच्छा शक्ति, लगन और कुछ कर गुजरने का दिल में जज्बा हो तो किसी भी तरह की बाधाएं किसी भी सफलता में बाधक नहीं बन सकती है. इस तथ्य को साबित किया है तिसरी की दो बेटियां विनीता कुमारी और शिखा कुमारी ने.

शिखा और विनीता ने JPSC की परीक्षा में लहराया परचम, जानें कौन हैं दोनों बेटियां

झकास न्यूज

तिसरी, गिरिडीहः दृढ़ इच्छा शक्ति, लगन और कुछ कर गुजरने का दिल में जज्बा हो तो किसी भी तरह की बाधाएं किसी भी सफलता में बाधक नहीं बन सकती है. इस तथ्य को साबित किया है तिसरी की दो बेटियां विनीता कुमारी और शिखा कुमारी ने. तिसरी जैसे पिछड़े इलाके में शिक्षा की बेहतर व्यवस्था नहीं रहने के बावजूद एक सुविधा प्राप्त छात्र और छात्रा की तरह जीवन के थपेड़ों को झेलते हुए अपने बुलंद हौसले और कठिन मेहनत से आज विनीता और शिखा दोनों ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है. जहां से सभी तरह से सक्षम छात्र और छात्रा को चुनौती देती प्रतीत हो रही है.

तिसरी के निवासी कृष्णा बर्णवाल और मंती देवी की छोटी बेटी विनीता कुमारी ने जेपीएससी की परीक्षा में 84 वां स्थान प्राप्त की है. वहीं तिसरी के संजय राम और सुदीप्ता कुमारी की बेटी शिखा कुमारी ने 138 वां रैंक लाकर  जेपीएससी की परीक्षा में परचम लहराने का काम किया है. शिखा और विनीता ने जेपीएससी की परीक्षा में परचम लहराकर ना सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि तिसरी प्रखण्ड का नाम रोशन करने का काम किया है. मालूम हो कि विनीता के पिता कृष्णा बर्णवाल की तिसरी बाजार में छोटी सी दुकान है, जबकि संजय राम की तिसरी में दवा की दुकान है. शिखा कुमारी तिसरी के अनूप आवासीय विद्यालय से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की. इसके बाद वह तिसरी अग्रवाला उच्च विद्यालय से मैट्रिक पहला स्थान से पास की. शिखा इंटर और बीए हजारीबाग और बीएड गिरिडीह से की. बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद शिखा तिसरी स्थित घर पर ही रहकर जेपीएससी की तैयारी करने लगी. मां सुदीप्ता कुमारी सरकारी स्कूल में शिक्षका है और पिता संजय राम दवा दुकान में बैठते हैं जिसके कारण शिखा को खाना बनाने से लेकर घर का लगभग काम करना पड़ता था. शिखा घर का सारा कामकाज करते हुए पूरी लगन और ईमानदारी पूर्वक पढ़ाई भी करती थी, जेपीएससी की परीक्षा निकालना शिखा का ड्रीम था. शिखा हरेक चुनौतियों को कबूल करके इससे सामना करती रही.

और आखिरकार पूरे जुनून के साथ पढ़ाई करके 

जेपीएससी की परीक्षा में कामयाबी हासिल की, शिखा अपने कामयाबी का सारा श्रेय अपनी मां सुदीप्ता कुमारी,पिता संजय राम और गुरुजनों को देती है. शिखा  समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान और देश की तरक्की के लिए काम करना चाहती है. इधर विनीता और शिखा की सफलता से उनके माता, पिता सहित तिसरी के लोग फुले नही समा रहे हैं.