हरसिंगार (पारिजात) के पौधे का औषधि उपयोग से घुटने का दर्द का अचूक इलाज़ इसके फायदे, औषधीय गुण, लाभ, नुकसान और

हरसिंगार (पारिजात) के औषधीय गुण व लाभ: भारत में जितने भी प्रकार के पेड़ पौधे फूल पत्ती मूल कण पाए जाते हैं उनमें अपनी एक औषधीय गुण होते हैं लेकिन हमारे ज्ञान और अनुभव के अभाव में हम इनके औषधीय गुणों का उपयोग नहीं कर पाते हैं हमारे भारत में कई ऐसे औषधि है जिसे हम अपने दैनिक जीवन में हर दिन देखते हैं और जानते हैं

हरसिंगार (पारिजात) के पौधे का औषधि उपयोग से घुटने का दर्द का अचूक इलाज़ इसके फायदे, औषधीय गुण, लाभ, नुकसान और

भारत में जितने भी प्रकार के पेड़ पौधे फूल पत्ती मूल कण पाए जाते हैं उनमें अपनी एक औषधीय गुण होते हैं लेकिन हमारे ज्ञान और अनुभव के अभाव में हम इनके औषधीय गुणों का उपयोग नहीं कर पाते हैं हमारे भारत में कई ऐसे औषधि है जिसे हम अपने दैनिक जीवन में हर दिन देखते हैं और जानते हैं लेकिन उसके औषधीय गुण लाभ नुकसान और परहेज के बारे में हमें पता ही नहीं होता है. शायद आज हम इन औषधीय पौधों का उपयोग करें तो हम जीवन भर निरोग और एक स्वस्थ जीवन जी सकते है. आज हम एक ऐसे ही औषधि पौधे के बारे में जानेंगे जिसे हरसिंगार या परिजात के नाम से जाना जाता है हरसिंगार के वृक्ष के छाल फूल और पत्ते का उपयोग कई रोगों के इलाज में किया जाता है. हमारे हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों में हरसिंगार का पेड़ के कई रहस्यमई महत्व और हरिवंश पुराण में परिजात के फूलों और पौधों का उल्लेख मिलता है

हरसिंगार (पारिजात) के औषधीय गुण व लाभ

एक पौराणिक साहित्य कथा के अनुसार हरसिंगार का वृक्ष सीधा स्वर्ग से धरती पर आया है. ऐसा कहा जाता है परिजात या हरसिंगार के वृक्ष का फूल केवल रात में खीलता है और सुबह में झड़ जाता है इसी वजह से इसे रात की रानी भी कहा जाता है हरसिंगार का वनस्पतिक नाम निक्‍टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस है इसके इस नाम का मतलब दुख का वृक्ष होता है.

  • Botanical name निक्‍टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस
  • पुष्प का रंग- गहरा सफ़ेद और मध्य भाग में हलाकि सी नारंगी रंग
  • हरसिंगार का संस्‍कृत नाम: पारिजात, शेफाली, शेफालिका
  • हरसिंगार का सामान्‍य नाम: हरसिंगार, पारिजात, रात की रानी, दुखों का पेड़, नाइट जैसमीन, कोरल जैसमीन, शिउली
  • हरसिंगार का उपयोगी भाग: फूल, पत्तियां, बीज

हरसिंगार या पारिजात के अन्य नाम

हरसिंगार पारिजात का पेड़ लगभग भारत के सभी राज्यों में पाया जाता है और हर राज्य में इसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है जैसे

  • हिन्दी – हरसिंगार, पारिजात, कौरी, सिहारु, सेओली
  • अंग्रेजी - तड़ी ऑफ सेलडनैस (दुख का पेड़), मस्कवर (कस्तूरी का फूल), कोरल जैसमिन (कोरल चमेली), नाईट जैसमिन (रात की चमेली)
  • संस्कृत - पारिजात, पुष्पक, प्राजक्त, रागपुष्पी, खरपत्रक
  • उत्तराखंड - कुरी (कुरी), हरसिंगार (हरसिंगार)
  • उड़िया - गोडोकोडीको (गोडोकोडिको), गंगा सेयोली (गंगा सियोली)
  • उर्दू - गुलेजाफ़री (गुलेजाफ़री), हरसिंगार (हरसिंगार)
  • असीमिया - सेवाली (सेवाली)
  • कोंकणी - पारिजातक (पारिजातक), पारदिक (पार्डिक)
  • कन्नड़ - गोया (गोली), पारिजात (पारिजात)
  • गुजराती -हरशणगार (हर्षंगर), जयपार्वती (जयपार्वती)
  • तमिल - मंझटपू (मंजत्पु), पवलमल्लिकै (पावलमल्लिका)
  • तेलुगू - सेपाली (सेपाली), पाग डम्ले (पगदमल्ले), कंपिलानागदुस्तु (कपिलानागदुस्तु)
  • बंगाली - हरसिंघार (हरसिंघार), सेफालिका (सेफालिका), शेउली (सेउली)
  • नेपाली - पारिजात (पारिजात)
  • पंजाबी - हरसिंघार (हरसिंघार), कौरी (कुरी), पकुरा (पकुरा)
  • मराठी - पारितक (पारिजातक), राइजर (खुरसाली)
  • मलयालम - पविलामल्ली (पविलामल्ली), परिजातकम (परिजातकम)

हरसिंगार गठिया रोग या घुटने का दर्द का अचूक औषधि है

हरसिंगार में एक प्रकार का एंटी-रूमेटिक गुण होता है, जो गठिया या घुटने के दर्द के लिए लाभकारी होता है इसकी पत्तियों का प्रयोग घटिया ही नहीं बल्कि मांस पेशियों के तनाव और मांसपेशियों के दर्द को भी ठीक करता है इसका उपयोग कई तरह से किया जा सकता है जैसे हरसिंगार के पत्ते फूल और टहनियों के रस को पीने से भी जोड़ों के दर्द और सूजन ठीक हो जाते हैं तथा जोड़ों पर इसके फूलों का लेप लगाने से सूजन में आराम मिलता है

विधि : हरसिंगार के करीब पांच से सात पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को एक गिलास पानी में मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं. जब पानी आधा रह जाए, तब इसे बंद कर दें और गुनगुना रहने पर पी लें. इसका सेवन सुबह खाली पेट करना अच्छा होता है

सावधानियाँ : हरसिंगार का काढ़ा लेने से पहले कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए जैसे इस काढ़े का सेवन हमेशा बैठकर ही करना चाहिए, काढ़ा के सेवन के बाद करीब 1 घंटे तक कोई भी चीज ना खाएं, रोजाना नया काढ़ा बनाकर पिए, काढ़ा बनाकर फ्रीज में स्टोर ना करें. वर्ना इसके विपरीत परिणाम हो सकते है.

हरसिंगार (पारिजात) के औषधीय गुण व लाभ

हरसिंगार का उपयोग और भी कई प्रकार के बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है, इसका उपयोग बाबासीर, ह्रदय रोग, बुखार, सुखी खांसी, हड्डियों का फ्रैक्चर, साइटिका, रक्त को साफ करने, घाव को जल्दी भरने, चर्म रोग से छुटकारा, लंबे काले घने मजबूत बाल, मधुमेह के इलाज और पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए भी किया जाता है,

इन सभी में इसकी पत्तियां और फूलों का काढ़ा का ही उपयोग किया जाता है इसके पत्तियां और फूलों का काढ़ा के रोजाना सेवन से इन सभी बीमारियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है, हालांकि हरसिंगार के नुकसान की बात करें तो इस दिव्य औषधीय पौधे का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं देखा गया है. आप निरोग जीवन जीने के लिए दैनिक जीवन में इसका उपयोग कर सकते  है.