स्वास्थ्य विभाग की बदहाली, मोबाइल की रोशनी में लड़की का ऐसे हुआ इलाज

झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग बेहतर व्यवस्था के लाख दावे करें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है. दुमका जिले के शिकारीपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अगर बिजली कट जाती है, तो मरीज का इलाज मोबाइल की रोशनी में किया जाता है. यह सुनकर भले ही आपको अचरज हो, लेकिन यही सच्चाई है. 

स्वास्थ्य विभाग की बदहाली, मोबाइल की रोशनी में लड़की का ऐसे हुआ इलाज

Jhakash News 

दुमका: झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग बेहतर व्यवस्था के लाख दावे करें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है. दुमका जिले के शिकारीपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अगर बिजली कट जाती है, तो मरीज का इलाज मोबाइल की रोशनी में किया जाता है. यह सुनकर भले ही आपको अचरज हो, लेकिन यही सच्चाई है. 

बता दे कि सोमवार की देर शाम स्थानीय कस्तूरबा विद्यालय की कक्षा सात की छात्रा उषा कुमारी अचानक बेहोश हो जाती है. शिक्षकों के द्वारा उसे शिकारीपाड़ा सीएससी लाया जाता है, लेकिन उस वक्त बिजली कटा हुआ था. छात्रा का इलाज मोबाइल की रोशनी में शुरू किया. जाहिर है कि इलाज के नाम पर खानापूर्ति की गई, क्योंकि तत्काल उसे दुमका के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया गया. अब बड़ा सवाल यह है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर लाखों - करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी अगर मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

मामले में अस्पताल में कार्यरत नर्स का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं अक्सर बिजली कट जाने में हमे इस परेशानी को झेलना पड़ता है. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इन पर संज्ञान लेने की आवश्यकता है.